रोहतक हत्याकांड : हत्या की वजह का हुआ खुलासा, लोगों के याद आई 20 साल पुराने ‘रेलु राम पुनिया’ हत्याकाण्ड की

रोहतक : हरियाणा के रोहतक जिले में झज्जर चुंगी स्थित विजय नगर की बाग वाली गली में हुई 4 हत्याओं की गुत्थी सुलझ गई है। बेटे ने ही अपने मां-बाप, बहन और नानी की हत्या की। आरोपी अभिषेक उर्फ मोनू (20) इस समय पुलिस गिरफ्त में है और पुलिस पूछताछ में उसने हत्याकांड का राज उगला।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसपी ने किया खुलासा
बुधवार सुबह साढ़े 9 बजे SP राहुल शर्मा प्रेस कॉन्फ्रेस करके मामले का खुलासा किया। वारदात को अंजाम देने की वजह थी प्रॉपर्टी विवाद और आपसी कहासुनी। पुलिस के अनुसार, प्रॉपर्टी बहन के नाम थी, जिस वजह से अभिषेक नाराज था। इसलिए उसने हत्याकांड को अंजाम दिया। पुलिस ने चार दिनों तक संदिग्धों से पूछताछ के बाद मुख्य आरोपी को सोमवार को पूछताछ के लिए उठाया और फिर सच सामने आया।

बीए का छात्र है आरोपी
बता दें ‌कि 27 अगस्त की दोपहर को झज्जर चुंगी स्थित विजय नगर की बाग वाली गली में रहने वाले पेशे से प्रॉपर्टी डीलर और पहलवान प्रदीप उर्फ बबलू, उसकी पत्नी बबली, साथ रोशनी और बेटी तमन्ना को घर में घुसकर गोली मारी गई थी। बबलू, बबली और रोशनी की मौत मौके पर हो गई थी, जबकि तमन्ना ने अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ा। वहीं हत्याकांड का मुख्य आरोपी अभिषेक उर्फ मोनू मृतक बबलू का इकलौता बेटा है और BA फर्स्ट ईयर, जाट कॉलेज का छात्र है।

रोहतक हत्याकांड ने ताजा किया 20 साल पुराना हिसार का रेलूराम पुनिया हत्याकांड
रोहतक में प्रॉपर्टी के लिए हुए हत्याकांड ने 20 साल पहले हिसार के उकलाना एरिया में हुए विधायक रेलूराम पुनिया हत्याकांड को ताजा कर दिया है। प्रॉपर्टी के लिए रिश्तों से नाराजगी के कारण निर्दलीय विधायक रेलूराम पुनिया समेत उनके परिवार के 8 लोगों की हत्या उन्हीं की बेटी सोनिया व दामाद संजीव ने की थी।

23 अगस्त 2001 को सोनिया व संजीव ने उकलाना के लितानी गांव में विधायक रेलूराम पुनिया (50), उनकी दूसरी पत्नी कृष्णा (41), बेटी प्रियंका (16), बेटा सुनील (23), बहू शकुंतला (20), पोते लोकेश (4), पोतियां शिवानी (2) और प्रीती (3 महीने) की फार्म हाउस में लोहे की रॉड से हमला करके हत्या कर दी थी।

हत्याकांड के बाद सोनिया ने भी जहर पीकर जान देने को कोशिश की थी, लेकिन वह बच गई। इस पूरे हत्याकांड और उसके खुलासे ने पूरे प्रदेश को हैरान कर दिया था। सोनिया और संजीव को इस हत्याकांड के लिए दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई गई है। राष्ट्रपति द्वारा दोनों दोषियों की दया याचिका खारिज की जा चुकी है, लेकिन फांसी न दिए जाने को ज्यादा समय बीत जाने के कारण मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है।